Thursday, 3 May 2018

आज फिर हमें तुम्हारे फ़ोन का इंतज़ार सा हैं.

घनघोर अंधेरे में रोशनी का दीदार  सा हैं
आज फिर हमें तुम्हारे फ़ोन का इंतज़ार सा हैं.

दो पल के रिश्ते में तुम सकुने उम्र दे गये
मेरे वजूद पर तेरे सोहबत का उधार सा हैं..

लाते ला ते तूफान हमे ये किधर लाया हैं
पास मेरे तुम दूर चल दिये जबके काफिला मझधार सा हैं

रोज़ी रोटी के फेरो ने हमदर्दी की मार दिया
पल दो पल का मिलना तो बस रिश्तो का व्यपार सा हैं..

माना मैंने की तुम काँटो पर चलते हो,
आकर देखो रस्ता मेरा भी तलवार की धार सा हैं...

Thursday, 22 March 2018

धीरे- धीरे तू सबकुछ भूल जाएगी.....

नये फूल खिलेंगे,नई बहारे आयेगी,
धीरे- धीरे तू सबकुछ भूल जाएगी..

डोली सजेगी तू दुल्हन बनेगी,
हाथो मे मेहदी माथे पर बिंदिया चमकेगी
तेरे घर रोशनी की बारात भी आएगी,
धीरे- धीरे तू सबकुछ भूल जाएगी.....

पलके फिरसे सपने सजायेगी
जागी-जागी राते  बाते बनाएगी
रूठना मनाना,
Date पे बाहर जाना
फोन की घंटियां फिर उम्मीदे जगाएगी,
धीरे- धीरे तू सबकुछ भूल जाएगी.....